Moradabad : छजलैट बवाल के दौरान नाबालिग अब्दुल्ला आजम अदालत ने की जन्मतिथि निर्धारित

जिला जज डॉ. अजय कुमार की अदालत ने अब्दुल्ला आजम की उम्र निर्धारित कर दी। 16 साल पुराने छजलैट प्रकरण में दोषी ठहराए गए अब्दुल्ला आजम ने खुद को नाबालिग बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में सजा के खिलाफ अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जिला जज की अदालत में सुनवाई चली। अदालत ने अब्दुल्ला आजम की जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 निर्धारित की है। अदालत ने सबूतों के आधार पर अब्दुल्ला आजम के वाद को खरिज कर दिया।

सोलह साल पहले दो जनवरी 2008 को छजलैट थाने के सामने वाहन चेकिंग के दौरान रामपुर के पूर्व सपा सांसद एवं पूर्व मंत्री आजम की गाड़ी पुलिस ने रुकवा ली थी। जिसको लेकर सपा नेता और कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए थे। इस मामले में आजम खान, अब्दुल्ला आजम समेत अन्य नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इस मामले में मुरादाबाद की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दोषी करार देते हुए दो-दो साल की सजा सुनाई थी। शेष आरोपियों को मुकदमे से साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था। 

अब्दुल्ला आजम ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हुए कहा था कि वह घटना के वक्त नाबालिग थे। जिन्हें अवर न्यायालय को सजा देने का अधिकार नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने जनपद न्यायाधीश मुरादाबाद को आदेशित किया गया कि वह अब्दुल्ला आजम की उम्र का निर्धारण कर रिपोर्ट भेजें। जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन गुप्ता एवं सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव अग्रवाल और मोहन लाल विश्नोई ने बताया कि जनपद न्यायाधीश डॉ. अजय कुमार ने दोनों पक्षों की ओर से बहस सुनी। दोनों पक्षों ने अदालत में दस्तावेज भेज पेश किए। अदालत ने दोनों पक्षों की ओर से दाखिल किए गए सबूतों के आधार पर अब्दुल्ला आजम की जन्म जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 की निर्धारित की है। 2 जनवरी 2008 को अब्दुल्ला आजम की उम्र 15 साल एक दिन थी। अदालत ने अब्दुल्ला को नाबालिग घोषित किया है। अदालत ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में भेज दी है।

मजिस्ट्रेट कोर्ट में नहीं किया था नाबालिग होने का दावा

जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन गुप्ता ने बताया कि छजलैट प्रकरण में एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम और आजम खां को 13 फरारी 2023 को दो- दो साल की सजा सुनाई थी। अब्दुल्ला आजम द्वारा कभी भी मुकदमे की सुनवाई दौरान अदालत में प्रार्थना पत्र नहीं दिया। मात्र मुकदमे में बहस के दौरान ही इस बात को लेकर आए थे। जनपद न्यायाधीश की अदालत में उनकी जन्मतिथि के निर्धारण का मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार आया था। जिसमें अदालत ने दस्तावेजों के आधार पर उनकी जन्मतिथि का निर्धारण करते हुए रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट भेजी गई है।

दो जन्म प्रमाण पत्र तजीन फात्मा समेत पिता-पुत्र को हुई है सात साल की सजा

अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाण पत्र का मामला रामपुर न्यायालय में चल रहा था। इस मामले में अदालत ने 18 अक्तूबर 2023 को अब्दुल्ला आजम, डॉ. तजीन फात्मा और अब्दुल्ल आजम को दोषी मानते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई थी। जिसका आदेश भी अभियोजन पक्ष द्वारा जनपद न्यायाधीश डॉ. अजय कुमार की अदालत में पेश किया गया था। जिसके खिलाफ अब्दुल्ला आजम के वकील कोई ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके जो उनकी इस बात को प्रमाणित करे कि उनका जन्म 30 सितंबर 1990 को हुआ था
चार माह में आया जन्म निर्धारण का फैसला
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मोहन लाल विश्नोई ने बताया कि अब्दुल्ला आजम की उम्र निर्धारण करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनपद न्यायाधीश डॉ. अजय कुमार की अदालत को भेजा गया था। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने जनपद न्यायाधीश से आख्या मांगी थी कि अब्दुल्ला आजम के जन्मतिथि का निर्धारण करें और रिपोर्ट प्रेषित करें। अब्दुल्ला आजम की जन्मतिथि निर्धारण का मामला 12 अक्तूबर 2023 से जनपद न्यायाधीश की अदालत में चल रहा है। महज चार माह में ही निस्तारित कर दिया गया।

13 फरवरी 2023 को सुनाई गई थी पिता-पुत्र को दो-दो साल की सजा

छजलैट प्रकरण में मुरादाबाद की एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम को जनता को उकसाने और सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने का दोषी करार देते हुए 13 फरवरी 2023 को दो- दो साल की सजा सुनाई थी। जिसके बाद पिता पुत्र ने अलग-अलग जिला जज की कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। अपील में सफलता न मिलने पर अब्दुल्ला आजम सुप्रीम कोर्ट की शरण पहुुंच गए थे। जिसमें कहा कि उनके खिलाफ अदालत ने गलत आदेश पारित किया है क्योंकि घटना के वक्त नाबालिग थे

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